Tuesday, 22 July 2025

अमेरिका ने यूनेस्को से तोड़ा नाता, इज़रायल के खिलाफ पक्षपात का आरोप

वाशिंगटन। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के तहत काम करने वाली शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को (UNESCO) से अपनी सदस्यता समाप्त करने का फैसला सार्वजनिक कर दिया है। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि यूनेस्को ने इज़रायल के प्रति पूर्वाग्रही रवैया अपनाया है और ऐसे सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों को बढ़ावा दिया है, जो विवाद को जन्म दे सकते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यूनेस्को की मौजूदा कार्यशैली अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं है और संस्था ऐसी दिशा में आगे बढ़ रही है, जो राष्ट्रीय हितों से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में यूनेस्को ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर ध्यान केंद्रित करते हुए विश्वस्तरीय वैचारिक मुद्दों को प्राथमिकता दी है। यूनेस्को द्वारा फिलिस्तीन को सदस्य राष्ट्र के रूप में स्वीकार करने के फैसले पर अमेरिका ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे इज़रायल विरोधी भावना फैलने का खतरा और बढ़ गया है। यूनेस्को का कहना है कि वह शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समझ को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। यह संस्था विश्व धरोहर स्थलों की सूची का प्रबंधन भी करती है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ, तंजानिया का सेरेन्गेटी, ग्रीस का एथेंस का एक्रोपोलिस और मिस्र के पिरामिड जैसे स्थल शामिल हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब अमेरिका ने यूनेस्को से नाता तोड़ा हो। 1980 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के कार्यकाल में भी अमेरिका ने संस्था पर भ्रष्टाचार और सोवियत समर्थक होने का आरोप लगाते हुए सदस्यता छोड़ दी थी। बाद में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में अमेरिका फिर से यूनेस्को में शामिल हुआ। हाल के वर्षों में भी अमेरिका का यूनेस्को के प्रति रुख आलोचनात्मक ही रहा। 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को यूनेस्को से बाहर करने का फैसला लिया था, जिसे राष्ट्रपति जो बाइडन ने पलटते हुए अमेरिका को फिर से सदस्य बनाया। अब एक बार फिर ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने यूनेस्को छोड़ दिया है।

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