अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नई दिल्ली के रूसी तेल खरीदने को लेकर भारतीय सामानों पर अतिरिक्त कर लगाने के आदेश के बाद भारतीय निर्यातकों ने कहा है कि इससे व्यापार और अधिक जटिल हो गया है ।
निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा पहले से ही 25% टैक्स लगाए जाने के बाद व्यापार में गिरावट आई है, और अब नए टैक्स से स्थिति और बिगड़ जाएगी ।
बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन में मास्को के युद्ध को आर्थिक रूप से सहयोग देने के आरोप में भारत पर अतिरिक्त 25% टैक्स लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। इससे भारतीय उत्पादों पर तीन हफ्तों के भीतर अमेरिकी टैक्स की दर दोगुनी हो जाएगी ।
भारत, जो कच्चे तेल पर भारी छूट के चलते रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन चुका है, अब अरबों डॉलर की बचत कर रहा है ।
भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस निर्णय की निंदा करते हुए इसे "अनुचित और अन्यायपूर्ण" बताया है ।
भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हान ने कहा कि उन्हें इस कदम से गंभीर प्रभाव की आशंका है ।
उन्होंने एक बयान में कहा, “यह फैसला भारतीय निर्यात के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि अमेरिका हमारे कुल निर्यात का लगभग 55% हिस्सा लेता है, जो सीधे तौर पर प्रभावित होगा । 50% पारस्परिक टैक्स से लागत का बोझ बढ़ेगा और हमारे निर्यातक 30–35% प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान में आ जाएंगे ।”
कैपिटल इकोनॉमिक्स के सिलान शाह ने कहा, “अगर राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित अतिरिक्त 25% टैक्स लागू रहा, तो उभरते हुए मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की छवि कमजोर हो जाएगी ।”
शाह के अनुसार, अमेरिकी खर्च भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब 2.5% हिस्सा है ।
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