काठमांडू ।
सावन मास के अंतिम सोमवार पर आज नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर सहित देशभर के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। सुबह 3 बजे से ही पशुपतिनाथ के चारों द्वार भक्तों के लिए खोल दिए गए। सावन मास और सोमवार भगवान शिव को समर्पित होने के कारण श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना एवं दर्शन के लिए उमड़े ।
पशुपति क्षेत्र विकास कोष के सदस्य सचिव सुवासचंद्र जोशी ने बताया कि भक्तों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर में प्रवेश के लिए चार अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं —
गौरीघाट–उमाकुंड–रुद्रगाडेश्वर मार्ग से पश्चिम द्वार
मित्रपार्क–दक्षिणामूर्ति से पश्चिम मुख्य द्वार
जयबागेश्वरी–भुवनेश्वरी–शंकराचार्य मठ से पश्चिम मुख्य द्वार
पिंगलास्थान–चार शिवालय–पंचदेवल से दक्षिण द्वार
धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार को स्नान कर शिवालय में पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है और सौभाग्य प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं अपने पति के दीर्घायु की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित योग्य वर की। इस अवसर पर भक्तों की सुविधा के लिए जूते-चप्पल रखने की अतिरिक्त व्यवस्था और भक्तों को लाने के लिए चक्रपथ में चार बसें भी चलाई गईं।
गोकर्णेश्वर में भी श्रद्धालुओं का जमावड़ा
राजधानी के उत्तर-पूर्व में स्थित गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालु पूजा और दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। परंपरा है कि पशुपतिनाथ में श्रीयंत्र और गोकर्णेश्वर में बालयंत्र की पूजा करने के बाद ही पूजा पूर्ण मानी जाती है। इस मान्यता के कारण भक्त दोनों मंदिरों में जाते हैं।
बोल बम यात्रा और जलाभिषेक की परंपरा
सुंदरीजल से शुद्ध जल लाकर पशुपतिनाथ में अर्पण करने की परंपरा भी सावन सोमवार को निभाई जाती है। बोल बम यात्रा में शामिल श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर, कांवड़ और जल से भरे घड़े लेकर पैदल यात्रा करते हैं। यह जल पशुपतिनाथ के साथ-साथ गोकर्णेश्वर और मार्ग में आने वाले अन्य शिवालयों में भी अर्पित किया जाता है।
भगवान शिव को जल अर्पण विशेष प्रिय माना जाता है। सावन मास में गंगा जल, गाय का दूध आदि से रुद्राभिषेक करने की भी परंपरा है, जिसे घर में सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। राजधानी के अन्य शिवालय जैसे वसंतपुर स्थित सानो पशुपतिनाथ (मक्खन महादेव) में भी आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।

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